नज़र किसी की लगी ना कोई बेलज्ज़त-गुमनाम हो गया
महत्व्कंक्षावों के लहर में हिंदुस्ता का ऐ अंजाम हो गया
ना हरिनाम बचा, बेपानी रमजान हो गया
एक ही मुल्क में दो कानून,वोट बैंक बेलगाम हो गया
खालसा को भूल कोई सरदार बलवान हो गया
कोई बात तो थी जो दारा सरेआम हो गया
भगवा रंग चढ़ाके साधू आतंक परवान हो गया
अमन पढानेवाला गुरु आतंकी अनजान हो गया
भिक्षाटन करनेवाला साधू भगवन के नाम धनवान हो गया
शीघ्र धनि होने के इस दौड़ में हर कोई बेईमान हो गया
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महत्व्कंक्षावों के लहर में हिंदुस्ता का ऐ अंजाम हो गया
ना हरिनाम बचा, बेपानी रमजान हो गया
एक ही मुल्क में दो कानून,वोट बैंक बेलगाम हो गया
खालसा को भूल कोई सरदार बलवान हो गया
कोई बात तो थी जो दारा सरेआम हो गया
भगवा रंग चढ़ाके साधू आतंक परवान हो गया
अमन पढानेवाला गुरु आतंकी अनजान हो गया
भिक्षाटन करनेवाला साधू भगवन के नाम धनवान हो गया
शीघ्र धनि होने के इस दौड़ में हर कोई बेईमान हो गया
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