इन हसीनों की बला ए नादाँ
तुझे बनना था क्या तू क्या बन गया
आशिकी तक तो हालात काबू में थे
दिवाना मगर तू बाकायदा बन गया
उन बेखबरों को खबर न लगी
कुदरत का तराशा इक रत्न
चर्चाएँ आम थी खूबियाँ जिसकी
किस कदर बावला बन गया II .... जगमोहन " कल्प "
तुझे बनना था क्या तू क्या बन गया
आशिकी तक तो हालात काबू में थे
दिवाना मगर तू बाकायदा बन गया
उन बेखबरों को खबर न लगी
कुदरत का तराशा इक रत्न
चर्चाएँ आम थी खूबियाँ जिसकी
किस कदर बावला बन गया II .... जगमोहन " कल्प "

