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बनना था क्या और क्या बन गया

 
 वफ़ा जिससे की बेवफ़ा हो गया,
जिसे बुत बनाया ख़ुदा हो गया |.....राना नवीन


इन हसीनों की बला ए नादाँ
तुझे बनना था क्या तू क्या बन गया
आशिकी तक तो हालात काबू में थे
दिवाना मगर तू बाकायदा बन गया

उन बेखबरों को खबर न लगी
कुदरत का तराशा इक रत्न
चर्चाएँ आम थी खूबियाँ  जिसकी
किस कदर बावला बन गया      II ....      जगमोहन " कल्प "




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