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ram bane ghum rahe ho

 जलता रावण पूछ रहा, बता मेरी खता क्या है?

राम बने घूम रहे हो तुमलोगों में बचा क्या है ?

धू धू करके जल रहा मैं आत्मा मेरी चीत्कार रही,

तेरी बहन को छेड़े कोई तो क्या कहोगे खूब कही !




हर वर्ष मुझे जलाते हो प्रदुषण फेलाते हो,

बचे राख से भी नदी गंदी कर जाते हो।



मृग-हत्या, बाली-हत्या, गर्भवति पत्नी हत्या,

हंसी आती है तुझपे जो घर फोडू के नाम का बजाते हो ।




तुम्हारी पत्नी भी हो, तो तुम भी ढूँढने जाओगे,

अपने स्वार्थ के पीछे, दुनिया नहीं जुटाओगे,

गर्भवती पत्नी को घर से नहीं भागाओगे I

तुम भी सबसे उत्तम हो मर्यादा पुरषोत्तम हो l 

                              जगमोहन

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